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रिक्शे वाले ने बारिश में जबरदस्ती चोदा

 दोस्तों में 21 साल की पंजाबी लड़की हूँ और दिल्ली के कॉलेज में पढ़ रही हूँ। बात अभी कुछ ही दिन पहले की है.. जुलाई का आखरी था और बारिश कभी कभी हल्की हो रही थी। में अपने होस्टल के रूम में बिस्तर पर बैठी हुई अपने फोन पर पॉर्न मूवी देख रही थी। अचानक ही मेरी एक फ्रेंड का फोन आया.. जो कि अपने घर गयी हुई थी।

कविता : हेल्लो महक ।

में : हाय कविता कैसी है और कब आ रही है वापस?

कविता : अरे यार यहां बस स्टैंड पर खड़ी हूँ.. मुझे पुलिस स्टेशन में काम है अर्जेंट और मेरे पास काफ़ी सामान है.. तू आजा साथ में डिनर करके चलेंगे मार्केट से।

में : ओह.. ओके में अभी आती हूँ.. सब ठीक तो है ना?

कविता : मेरा सेलफोन चोरी हो गया.. मुझे रिपोर्ट करनी है अभी।

में : फिर चोरी हो गया.. तू करती क्या है? बड़ी लापरवाह है और रिपोर्ट बाद में करा लेना।

कविता : अरे यार अभी ट्रैक हो जाए तो अच्छा है.. बाद में कोई कुछ नहीं करता।

में : ओके डार्लिंग टेन्शन मत ले.. में आती हूँ। फिर में जल्दी में तैयार हुई और बिना ब्रा के ही एक पीला टॉप और नीली जींस डाल ली। होस्टल के बाहर से रिक्शा पकड़ा जो कि ऊपर से खुला था.. ध्यान ही नहीं रहा कि बारिश हुई तो सब भीग जायेगा। बस स्टेण्ड करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर था और जो रास्ता है वो काफ़ी सुनसान सा है और बारिश के टाइम वहाँ और भी कम ट्राफिक होता है। रास्ते में जो डर था वही हुआ.. बारिश शुरू हो गई और में भीगने लगी.. खेर इतनी तेज़ बारिश नहीं थी.. इसलिये मैंने रिक्शा नहीं रुकवाया.. पर कुछ ही सेकेंड में बहुत तेज़ बारिश होने लगी।

मैंने रिक्शे वाले भैया को साईड में पेड़ के नीचे रुकने को कहा.. में जल्दी से रिक्शे से कूदकर पेड़ के नीचे भागी और रिक्शे वाले को मैंने पैसे भी नहीं दिए थे.. इसलिए वो रुक गया और अपनी सीट पर ही बैठे बैठे घूरने लगा।

रिक्शा वाला : मेडम थोड़ी ही दूर है.. वहां जाकर खड़ी हो जाना।

में : अरे दिख नहीं रहा भैया.. में भीग गई हूँ। एक तो छत नहीं है तुम्हारे रिक्शे में और ऊपर से भीगा दोगे.. रिक्शा वाला मुझे घूरे जा रहा था.. तभी अचानक से मुझे ध्यान आया.. हे भगवान मैंने ब्रा नहीं पहनी है और मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां साफ चमक रही है और बाहर गीली टी-शर्ट से तो अंदर का सब दिख रहा था क्लियर.. ऊपर से बारिश की ठंडी ठंडी बूंदे जिनकी वजह से मेरे निप्पल कड़क हो गये थे। रिक्शे वाले ने रिक्शा साईड में लगाया और मेरे पास आकर खड़ा हो गया.. मुझे जैसे ही ध्यान आया तो मैंने अपने हाथ फोल्ड कर लिए और नीचे सिर करके खड़ी हो गयी। शोर्ट टी-शर्ट पहनी थी.. जिससे मेरे हाथों में हल्की हल्की ठंड लग रही थी और जिससे में काँपने लगी। में फोन पर पॉर्न देखने के बारे में सोचने लगी और मेरे दिमाग़ में अजीब अजीब ख्याल आने लगे.. इतने में कविता का फोन आ गया.. तू कहां है महक .. में वेट कर रही हूँ।

में : अरे यार ऑटो नहीं मिला.. तो रिक्शे से आ रही थी और रिक्शे में छत ही नहीं है.. पेड़ के नीचे खड़ी हूँ अभी।

कविता : अरे यार।

में : तू बाद में रिपोर्ट करवा लेना। फिर फोन तो मिलेगा नहीं।

कविता : क्या पता मिल जाये।

में : अच्छा ठीक है बारिश कम होते ही आ रही हूँ। में फोन पर बात करते टाइम अपने हाथ नीचे कर चुकी थी.. जिससे रिक्शे वाले को खूब मज़ा आ रहा था.. वो मेरे साईड में खड़ा होकर मेरे उभारों को देखे जा रहा था। फिर वो बात करने की कोशिश करने लगा।

रिक्शे वाला : मेडम मौसम तो बढ़िया हो गया है.. अब मैंने सोचा कि ठीक है.. बातें करूँगी तो यह यहीं रहेगा और भागेगा नहीं.. तो में भी बातें करने लगी।

में : हाँ भैया कम से कम गर्मी तो कम होगी।

रिक्शे वाला : पर आप लेट हो गई बारिश में।

में : अब क्या करें.. किसी का फायदा तो किसी का नुकसान.. वेसे मुझे बारिश से कोई शिकायत नहीं है।

रिक्शे वाला : आप यू.पी से है?

में : नहीं में पंजाब से हूँ.. आप शायद यू.पी से हो.. रिक्शे वाला मुस्कुराने लगा।

रिक्शे वाला : मेडम आपका नाम क्या है? मुझे अजीब लगा कि ये क्या चाहता है जो नाम पूछ रहा है।

में : नाम का क्या करोगे?

रिक्शे वाला : मेरा नाम राज है.. ऐसे ही मेडम परिचय के लिये।

में : हाँ हाँ हाँ.. आप तो मुझे पढ़े लिखे लगते हो।

राज : हाँ मैने बी.ए किया है और में तो मजबूरी में रिक्शा चला रहा हूँ।

में : ओह।

राज : आप क्या करती है? मतलब क्या पढ़ रही है।

में : अरे वो जो कॉलेज था ना.. जहाँ आप खड़े थे.. वहां पढ़ती हूँ।

राज : अरे याद आया.. मैंने आपको कई बार आते जाते देखा है। राज थोड़ा पास आ गया.. मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा.. एक तो दिमाग़ मे पॉर्न मूवी चल रही थी.. जिसे देखकर में उंगली कर रही थी.. ऊपर से टी-शर्ट में खड़ी निपल्स। राज बड़ा ही हंसमुख आदमी था.. मुझसे हाईट में कुछ छोटा और पतला सा था.. मुँह काफी पतला था और करीब 35--36 के आस पास उम्र होगी.. उसकी दाढ़ी हल्की सी थी.. दो तीन मिनिट तक तो वो खुद ही बोलता रहा। मेरे मन में अब लंड घूम रहा था.. मोटा सा लंड अपनी चूत में लेने की इच्छा हो रही थी।

फिर मेरे दिमाग़ में आया कि क्यों ना में राज के साथ ही कुछ शरारत करूँ.. मैंने अपने दोनों हाथ कमर पर रख लिए और फिर एक हाथ से टी-शर्ट को बाहर की तरफ खींचा.. खींचते ही टी-शर्ट से चिपके हुये मेरे गोल गोल मोटे चूचे अलग हो गये.. राज बड़े ध्यान से देख रहा था और उसका मुँह शुरू से ही मेरी तरफ था।

में : अच्छा तो आप मुझे देखते क्यों थे?

राज : अरे मेडम इतनी खूबसूरत हो.. नज़र तो टिकेगी ही.. में अकेला थोड़ी हूँ.. आप के कॉलेज के लड़के भी तो देखते है।

में : तो क्या? बताओ।

राज : वही तो इशारे से पूछते थे कि अच्छा लगा।

में : ओह ऐसा है क्या? अच्छा तो फिर आप क्या कहते थे।

राज : सच ही कहा था मेडम।

में : क्या कहते थे.. मैंने अपनी आँखें बड़ी की और सीधा राज की आँखों में बड़े प्यार से देखा।

राज : यही कि बड़ा मज़ा आया।

में : ह्म्म्म्म देख के मज़ा आता है?

राज : और नहीं तो क्या मेडम।

में : मेडम मत कहो.. प्लीज़ मेरा नाम महक है.. बड़ा अजीब लगता है अपने से बड़े लोगों से मेडम सुनना।

राज : ठीक है महक जी.. में सोच रही थी कि मर्द बड़ा रेस्पेक्ट देते है.. जब तक लड़की पट नहीं जाती.. लेकिन जब एक बार चोद लेते है.. तो रेस्पेक्ट को हमारी गांड मे डाल देते है। मुझे ये सोचकर हंसी आ गई कि अभी जब इसे चूत दे दूँगी.. तो फिर जी वी सब गायब हो जायेगा।

राज : क्या हुआ महक जी।

में : यही सोच रही थी कि आपको क्या मज़ा आता होगा.. राज भी इशारे पकड़ रहा था अब।

राज : आपको पता है क्या?

में : हाँ आजकल तो सब को पता होता है और में मुस्कुराकर अपनी छाती बाहर निकाल कर नीचे देखने लगी। मेरी चूचियां फिर गीली टी-शर्ट पर चिपक गयी थी.. अब राज का लंड भी पेंट का शेप बिगाड़ रहा था।

में : आपकी शादी हो गई होगी।

राज : हाँ.. अब राज की आँखें मेरे छाती पर टिकी थी और वो मुझसे एक हाथ की दूरी पर था।

में : फिर भी आप जवान लड़कियों को देखकर मज़े लेते हो?

राज : जितनी टाईट होती है ना उतना मज़ा आता है देखने में भी और इतना कहकर ही उसने अपना एक हाथ मेरे लेफ्ट बोबे पर रख दिया और हॉर्न की तरह ज़ोर से दो तीन बार दबा दिया।

में : आह.. ये क्या कर रहे हो आप?

राज : ड्रामा तो खूब कर लेती हो महक बेवकूफ़ समझती हो क्या? कब से लाइन दे रही हो।

में : में तो नॉर्मल ही बात कर रही थी और मैंने उसे हल्का सा धक्का दिया.. में भी मज़े ले रही थी।

राज : साली .. नोर्मल बातें सभी के लंड भी ले लेती होगी। फिर तो वो और मेरे उपर झपटा और मेरे मुम्मे को दोनों हाथों से पकड़ लिया। फिर कसकर होर्न बजाने लगा और आटे की तरह गूँथने लगा। मेरे हाथ उसके हाथों पर थे.. मेरी चूत अचानक ही उफन पड़ी और खूब सारा जूस बहने लगा। में शाम के उजाले में खुले रोड़ पर साईड में एक रिक्शे वाले से अपने मुम्मे दबवा रही थी.. ये सोचकर मुझे और जोश आ गया.. अब में मोन कर रही थी।

में : म्म्म्ममस्सस्स।

राज : साली मज़ा आने लगा। आ गयी तू लाइन पर.. ये कहकर उसने टी-शर्ट के उपर से ही मेरे मुम्मे के बीच मुँह रगड़ दिया।

राज : ब्ब्ब्बररररराआाहह। फिर मेरी पिचकारी छूट पड़ी।

राज : पसंद आ रही है साली रंडी।

में : ओह हाँ... पर यहाँ कोई देख लेगा.. कहीं और चलो।

राज : देख लेगा तो क्या? वेसे भी यहाँ कई रंडियां चुदती है कोई कुछ नहीं कहता।

में : अरे पर में रंडी थोड़ी ही हूँ।

राज : जो भी हो.. तू माल तो अच्छा है। उसने मेरी टी-शर्ट उपर की और अपना मुँह जितना खुल सके.. उतना खोलकर मेरे सीधे वाले मुम्मे पर चिपका दिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.. लग रहा था कि आज तो दूध ही निकल आयेगा। चूसते चूसते उसने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ पर दबा दिए और जानवरों की तरह दबाने लगा।

में : प्लीज़.. साईड में चलो.. में मना थोड़ी कर रही हूँ.. जो चाहो कर लेना लेकिन उस झाड़ी के पीछे चलो।

फिर राज मुझे झाड़ी के पीछे ले गया.. मुझे पीछे से दबोच कर जिससे कि उसका लंड मेरी गांड मे चुभ रहा था। झाड़ी के पीछे आते ही उसने मेरी टी-शर्ट निकालकर साईड में फेंक दी।

में : अरे क्या कर रहे हो.. मुझे जाना भी है कही गंदा मत करो। राज मेरे मुम्मे पर चींटे की तरह मुँह लगाकर चिपका हुआ था और ऐसे ही में टी-शर्ट उठाने लगी। फिर बड़ी मुश्किल से टी-शर्ट उठाकर साईड में रखी.. अब में ऊपर से नंगी थी और मेरा एक मुम्मे राज खा रहा था और एक लटक रहा था। मुझे अंदाज़ा हो गया कि ये बड़ा भूखा है.. आज तो हालत ख़राब कर देगा। फिर मैंने सोचा जल्दी ख़त्म करते है.. मैंने झट से अपनी जीन्स का बटन खोल दिया और उतारकर साईड में रख दी.. राज खड़ा होकर खुशी से देखने लगा।

राज : अपनी ठुकाई की तैयारी खुद ही कर रही है।

में : हाँ.. नहीं तो तुम तो सारा दिन मुम्मे ही चूसते रहोगे.. और मैंने दोनों मुम्मे को पकड़कर हिला दिया और फिर झट से पेंटी उतारी और ज़मीन पर ही कुत्तिया बन गई। मुझे लगा कि राज अपना लंड डालेगा.. देसी आदमी वेसे भी सिर्फ़ चुदाई ही जानते है.. मुझे लगा पर वो भूखे शेर की तरह मेरी चूत पर मुँह लगाकर जूस चूसने लगा.. मेरी चीख निकल गयी.. सुनने वालों ने कई दूर से सुन ली होगी.. ऐसी चीख थी।

में : क्या कर रहे हो.. खा ही जाओगे क्या?

राज : इतनी सुन्दर चूत है तेरी.. खानी ही पड़ेगी। ऐसी चूत तो सिर्फ़ विदेशी फ़िल्मो में देखी है।

में : तुम्हे पसंद आई?

राज : दिखाता हूँ कितनी पसंद आई। उसने फिर एक थप्पड़ घुमाकर मेरी चूत पर मारा और में एकदम से उछल गई।

में : आअहह.. जानवर ही हो क्या?

राज : शेर हूँ शेर।

में : शेर का तो लंड छोटा होता है.. काफ़ी बड़ा तो गधे का होता है और में हंस पड़ी। राज ने मुझे बाल पकड़कर उठाया.. शायद वो समझ चुका था कि मुझे काबू करना आसान है और में ज़्यादा कहूँगी नहीं.. मुझे उसने घुटनो के बल बैठाया और अपना पेंट खोल दिया। उसका लंड ज़्यादा बड़ा नहीं था.. पर उसकी हेल्थ के हिसाब से काफ़ी ज़्यादा मोटा था।

में : वाउ.. ये तो काफ़ी मोटा है..


इतना बोलते ही उसने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से चूत की तरह चोदने लगा.. लंड मेरे गले तक घुस रहा था.. वो चोदे जा रहा था.. मेरा चिपचिपा थूक निकलकर लंड पर लग गया। जिससे कि वो और चिकना हो गया और सरर सररर मुँह में अंदर बाहर होने लगा। में मुँह साईड में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसने मुझे कसकर बालों से पकड़ा हुआ था.. पर आख़िर में मुँह साईड में करने में कामयाब हो गई और वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरे गले की जगह वो मेरे गाल को अपने मोटे लंड से चोद रहा था.. गाल ऐसा लग रहा था कि फट ही जायेगा.. उसने खूब मुँह को चोदा। फिर जल्दी से मुझे मोड़ा और फिर से कुत्तिया बना दिया और ज़ोर से मेरी बाल -- रहित चूत की फंको को खोल कर अपने लंड का सुपाडा फस कर एक धक्का मार दिया।

राज : साली रांड़ कितनो से चुदवा चुकी है.. चूत तो खुली है तेरी.. पर काफ़ी टाईट है ।

में : आअहह ऊऊ.. मेरे बॉयफ्रेंड से ही बस।

राज : मेरा लंड केसा लगा तुझे।

में : मज़ेदार आआआअहह है काफी मस्त है लंड तुम्हारा.. पर थोड़ा और लंबा होता तो और गहरा उतर जाता.. हहस्सस्स।

राज : गहरे का क्या है? ये देख.. राज ने मेरी चूतड़ पर थप्पड़ मारा और पूरी जान लगाकर अपनी कमर हिलाने लगा.. लग रहा था कि लंड नहीं खंजर हो.. जो मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा है। इतना मज़ा आ रहा था कि क्या बताऊँ.. में वहां पड़े पड़े ही मज़े ले रही थी.. इतने में फोन बज पड़ा।

कविता : ओये कहां है तू?

में : यहीं हूँ।

कविता : बारिश तो कब की बंद हो गयी.. कब आयेगी।

में : अरे बस निकल रही हूँ।

राज : भोसड़ी की कौन है ये जो चुदाई में बाधा डाल रही है। मैंने पीछे मुड़कर इशारा किया चुप होने का.. राज मेरी पीठ से चिपक गया और मेरे उपर लगभग लेट गया और चोदना चालू रखा।

कविता : अरे यार तेरे चक्कर में कब से खड़ी हूँ.. तू अब जल्दी आजा।

में : बस पहुँच रही हूँ.. उऊऊइीईईई।

कविता : ये तेरी आवाज़ को क्या हुआ.. राज धीरे से मज़े लेता हुआ कहता है.. चूत चुद रही है रंडी की।

में : उउंम्म रोड़ पर गड्डे है यार काफी.. रिक्शे वाले धीरे चलाओ.. उउउइई माँआआ।

कविता : कौन से रास्ते से आ रही है तू.. खेर जल्दी आजा।

में : ठीक है।

में : फिर बच गई.. राज अब खूब तेज़ झटके मार रहा था। उसका मोटा पठानी लंड मेरी चूत के होंठो से चिपका हुआ जोर जोर से अंदर बहार हो रहा था उसने अपनी दोनों हथेली मेरी पीठ पर रखी.. हाथ सीधे किए और ज़मीन पर सिर्फ़ उसके पंजे थे.. जैसे मेरी पीठ को दबा रहा हो और फिर वो हथेली और पंजो के सहारे ही बेलेंस बनाकर जोरदार झटके मारने लगा। उसके झटके तेज़ हो रहे थे.. में समझ गई कि इसका निकलने वाला है.. में एकदम से आगे हुई और उसका लंड बाहर आ गया.. पर वो झटका मार रहा था और इसलिये बाहर आते ही लंड मेरी गांड के छेद में ज़ोर से लगा।

राज : माँ की लोड़ी आने वाला है.. क्या कर रही है? में एकदम से घुटनो के बल बैठी और अपने दोनों मुम्मे में उसका लंड समेट कर ऊपर नीचे करने लगी। उसने मुझे धक्का दिया और में पत्तो पर पीठ के बल गिर गई और वो मेरे उपर चड़ गया और मेरे पेट पर बैठकर अपना लंड मेरे बोबो के बीच फंसाकर आगे पीछे घिसने लगा। थोड़ी देर में उसकी पिचकारी मेरी गर्दन पर और मुम्मों पर बिखर गई.. मैंने मज़े लेकर उसका माल उंगली से चाटा.. वो मेरे उपर ही लेट गया और लिपट गया।

में : ले लिए मज़े अब तो।

राज : अभी कहां.. अभी तो असली काम बाकी है।

में : वो क्या?

राज : में तेरी मोटी गदराई गांड पर फिदा हूँ.. वो लेनी है।

में : ओह नो.. नहीं प्लीज़... अभी नहीं.. अभी मुझे जाना पड़ेगा.. में बाद में मिलूंगी कभी तो वो भी ले लेना।

राज : चल ठीक है कहां भागेगी.. अब तो तू मेरी रंडी है।

में : हाँ हाँ हाँ... फिर में उठी और राज ने अपना लंड चुसवाकर साफ करवाया। फिर अपने आपको राज की चड्डी से साफ किया और अपने कपड़े पहने। फिर में झाड़ी से बाहर आई.. तो देखा उसी रोड़ पर दूसरी साईड में ऑटो आ रहा था। उस ऑटो में कविता बैठी थी और मुझे देख रही थी.. उसने ऑटो रुकवाया.. पर ऑटो कुछ आगे जाकर रुका। राज पेशाब करके मेरे पीछे से निकला और रिक्शे पर बैठ गया.. कविता उसे मेरे पीछे से निकलते नहीं देख पाई थी।

राज : चलो मेडम।

में : ओह रूको.. मेरी दोस्त यहाँ है।

राज : चलो.. तो फिर अपना नम्बर तो बता दो.. मैंने राज का नम्बर लिया और फिर रिक्शे में बैठकर ही उसी साईड चल दी जहाँ से आई थी.. वेसे राज को भी वापस जाना था.. वहीं आगे में ऑटो के पास उतरी और ऑटो में बैठने लगी।

कविता : अरे पैसे तो दे दे बेचारे को.. में सोच रही थी कि चूत और मुँह तो दे ही दिया है और ऊपर से पैसे भी दूँ।

राज : अरे नहीं नहीं.. मेडम का ख़ाता है मेरे साथ.. कोई बात नहीं.. बाद में ले लूँगा.. जब कभी दिखेंगी। कविता ने कहा.. ओके और हम दोनों चल दिये.. कविता ने रास्ते में कहा.. मुझे सब पता है किस खाते की बात हो रही थी। मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी कि इसे कैसे पता चला? फिर होस्टल पहुँचने पर उसने बताया कि तुझे जो झटके लग रहे थे.. वो चुदाई ही हो सकती थी.. फिर मैंने आँख मारी और कहा कि क्या करूँ? चूत के लिए ये सब करना पड़ता है।

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